Sunday, September 19, 2010

My Favourites - Dr Kumar Vishwas(2)

मैं भाव सूचि उन भावों की...........

मैं भाव सूचि उन भावों की, जो बिके सदा ही बिन तोले
तन्हाई हूँ हर उस ख़त की, जो पढ़ा गया है बिन खोले
हर आंसू को हर पत्थर तक पहुंचाने की लाचार हूक
मैं सहज अर्थ उन शब्दों का जो सुने गए हैं बिन बोले
जो कभी नहीं बरसा खुलकर, हर उस बादल का पानी हूँ
लव-कुश की पीड़ बिना गायी, सीता की रामकहानी हूँ

जिनके सपनों के ताजमहल बनने से पहले टूट गए
जिन हाथों में दो हाथ कभी आने से पहले छूट गए
धरती पर जिनके पाने और खोने की अजब कहानी है
किस्मत की देवी मान गयी पर प्रणय देवता रूठ गए
मैं मैली चादर वाले उस कबीरा की अमृत-वाणी हूँ
लव-कुश की पीड़ बिना गायी, सीता की रामकहानी हूँ

कुछ कहते हैं मैं सीखा हूँ अपने जख्मों को खुद सीकर
कुछ जान गए मैं हँसता हूँ भीतर भीतर आंसू पीकर
कुछ कहते हैं मैं हूँ विरोध से उपजी एक खुद्दार विजय
कुछ कहते हैं मैं रचता हूँ खुद में मरकर खुद में जीकर
लेकिन मैं हर चतुराई की सोची समझी नादानी हूँ
लव-कुश की पीड़ बिना गायी, सीता की रामकहानी हूँ

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