Monday, October 11, 2010

इस कारण डूब नहीं पाया

मुझको इश्क के दरिया तक तो तेरी याद ने पहुँचाया
हल्का हुआ जो दिल खोकर, इस कारण डूब नहीं पाया

तुम जो मेरे साथ नहीं तो, यह भी मर्जी मेरी है
क्यूँ घबराना यह तो बस, दो-चार जन्मों की देरी है
गर सात जनम भी बीत गए तो, न होगी कोई व्याकुलता
चाँद से जो मिले हों उनके लिए न रात अंधेरी है

तुम्हारी मर्जी और मेरी मंशा में कभी कोई अंतर था
तुमने कभी न जाहिर की और मैं भी जान नहीं पाया
हल्का हुआ जो दिल खोकर...............

लोग कहीं कुछ पूछ ही लें तो, कुछ बोले न बनता है
कभी सामने आ जो गए तो, मन मेरा ये डरता है
कैसे तुमसे बात करेंगे, आँखें फेर न पाएंगे
वो आलिंगन अब नहीं संभव, मन कहाँ ये समझता है

साँसों से छू सकते फिर भी, होगी सदियों की दूरी
आँखों से बस टटोलते थे, शब्द कहाँ कोई बन पाया
हल्का हुआ जो दिल खोकर...............

अब तो मेरी ये उदासी, मेरे साथ ही रहती है
सुन न पाए, दूजा कोई, चुपके-चुपके कहती है
होता न कोई तुमसे बढ़कर, इस जग में मेरे पास
इक लड़की कुछ दिन से मगर, एक नाम नहीं लेती है

दो ही चीज मेरे, पास थे उनके, इक हंसी इक जान
वो लौटना भूल गए और मैं भी मांग नहीं पाया
हल्का हुआ जो दिल खोकर............

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