Sunday, August 28, 2011

मेरे सवाल मेरे जवाब




दूसरे कमरे में कहीं दूर पड़ा
अचानक जब फ़ोन ये बजता है
तो क्या अब भी दौड़ के जाती हो?



मेरी अब आदत नहीं रही ..........


हर हफ्ते, डाकिया सामने से जब
बिना कुछ दिए चला जाता है
तो क्या एक हूक सी उठती है?


आजकल लोग ख़त नहीं लिखते ........



अकेले कभी छत पर जाओ तो
किसी के आने के एक आहट का 
क्या अब भी इन्तजार करती हो?


आहट तो होती है ........... पर तुम नहीं आती


जब कहीं सामने एक लड़का-लड़की
हाथ पकड़े साथ में चलते हैं
तो क्या कुछ अधुरा सा लगता है?

मैं तो उधर देखता ही नहीं......... बस मुट्ठी बंद कर लेता हूँ


कहीं भीड़ में किसी अनजान को देख
एक बार भी, बस दो पल को
ऐसा लगा हो कि शायद मैं था ?

अक्सर होता है ...........पर हर बार चौंक जाता हूँ


एक सिनेमा साथ में देखने की
कोई सी भी, नयी-पुरानी
वो चाहत क्या अब तक बाकी है?

हाँ है ..........आज भी है


एक थाली में संग खाने की
अपने हाथों से खिलाने की
क्या आदत अब तक बाकी है?

हाँ है, पर आज कल पेट भर जाता है......... पहले तो मन भरता था


अब आखिरी सवाल .........
क्या अब भी वादे करती हो?

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