Sunday, May 4, 2014

वादों के गड़े मुर्दे अब न उखाड़ो !

वादों के गड़े मुर्दे अब न उखाड़ो !
चैन से साँस लेना हो तो
वादों का गला घोटो और
चुपके से दफ़ना आओ

वादे अपने वो बच्चे हैं
जिनके मारे जाने पर
पड़ोसी सवाल नहीं पूछते
दोस्त अफ़सोस नहीं जताते
किसी को कानों-कान
खबर नहीं होती और
मातम के रस्म से भी
हम बच जाते

और दस्तूर है  ...
वादों का तकाज़ा करने वालों नेa
बेवफ़ाई की तगड़ी फ़सल काटी है
इसलिए
वादों के गड़े मुर्दे अब न ही उखाड़ो !

Saturday, March 29, 2014

भगवान को खाँसी आयी थी !

जब कहा था तुमने प्यार हुआ
और मैं भी तैयार हुआ

….. तो ज़िन्दगी ने
ऐसी कड़क छौंक लगायी थी
कि भगवान को खाँसी आयी थी!

Thursday, March 20, 2014

मैं मनुष्य हूँ !

श्वान कितना भी उन्मत्त हो
भौंकता है, गुर्राता है ..  पर
स्वयं को काट न खाता है
मैं मनुष्य हूँ - यह दर्शाता है!