Saturday, March 29, 2014

भगवान को खाँसी आयी थी !

जब कहा था तुमने प्यार हुआ
और मैं भी तैयार हुआ
….. तो ज़िन्दगी ने
ऐसी कड़क छौंक लगायी थी
कि भगवान को खाँसी आयी थी!

5 comments:

  1. प्यारी सी कविता है। कभी कभी कम में ही बहुत कुछ रहता है। Slice of life जैसी कुछ। बी स्कूल के बाद लिखने का मन हुआ समझ आ रहा है मगर कहाँ हैं कहानियाँ? कहाँ हैं कवितायें?

    अपने एक पुराने ब्लौग पर कुछ बहुत अच्छे कमेंट्स देखे इस ब्लौग से तो सोचा कि देखें इधर कौन का मौसम है।

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    1. Aap mere blog tak aayengi ye to kabhi soch hi nahin tha! Aapke shabdon ka bahut bada prashanshak hu main. Dhanyavaad.

      Bahut dinon se kalam ruki huyi hai, Kuch purani kavitayein hain jinhe blog par dala nahi hai abhi tak.

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