Thursday, May 17, 2012

कब  मैंने  बोला ..


एक आस जो लेकर  जीता  हूँ , तो  तुम  क्यों  घबरा  जाते  हो 
कब  मैंने  ऐसा  बोला  है , कि  आकर  इनको  सच  कर  जाना 

मैं तो  सहरा , सदियों  से  प्यासा  
गंगा  को  क्या  मैं  जानूंगा  
छोटी  सी  एक  बावरी  को  भी 
सागर  से  बढ़कर  मानूंगा 
देना  न  देना  तुम्हारी  मर्जी ,
पर  चाहने  पर  किसी  का  जोर  नहीं 
फिर  मेरी  दो  घूँट  कि  आशा 
क्यों  सबको   सताती  है  इतना 

मुझसे  मेरी  प्यास  न  छीनो, और  न  इसका  इल्जाम  ही  दो 
कब  मैंने  बोला  गंगा  से  कि ,  प्यास  मेरी  बुझा  जाना 

मन  बच्चा  है , बहक  जाता 
बहल  भी  जायेगा , ऐसे  ही 
आज  हिचकता  है , आंसू  बहाता
संभल  भी  जायेगा , ऐसे  ही 
अपनी  बात  पर  खरा  उतरता  तो ,
उम्मीद  भी  रखता , वैसा  ही 
तभी  रोता  है  जब  ये  समझ  जाता 
कि  वो  बात  कही  थी  तुमने , ऐसे  ही 

आज  मेरी  पुकार  को  सुन , क्यों  तुम   पीछे  हट  जाते  हो 
कब  मैंने  ऐसा  बोला  कि , बिसरे  बातों  को  निभा  जाना 




Monday, January 2, 2012

और कौन?

एक छोटी सी लड़की को, मैं प्यार तो इतना कर बैठा
डेरा ऐसा डाला दिल में, कि अब आ पायेगा और कौन?

रचा जो परियों को होगा, फिर तो विधाता के आगे
प्रेरणा स्रोत एकमात्र, तू नहीं तो और कौन ?

आयेंगे भी तेरे कारण, तुमसे ही वो रुक पाएंगे
करता धर्ता मेरे आंसू का, है तेरे अलावा और कौन ?

आँखों कि सबसे दुलारी जो, वो चुभेगी गहरी एक दिन
जितनी अपनी उतनी ही परायी, हो पायेगा और कौन ?

एक शब्द नहीं बन पायेगा, एक हाथ नहीं बढ़ पायेगा
मेरी साँसों को यूँ समेट, ओझल हो जायेगा और कौन ?

उस महक में ऐसा डूबा हूँ, जिस फूल में बसती जान मगर
अजनबी तोड़ ले जायेगा जब, लाचार देखेगा और कौन?

बरसात में भूली भटकी सी, एक सूखी नदी उफनाई थी
बीतेगा जब ये मौसम, फिर बहेगा इसमें और कौन ?

एक बड़े उम्र में नन्हा सा मन, आज तो तुमने पहचान लिया
कल नन्हा जब वो रोयेगा, तो पुचकारेगा उसे और कौन?