संदेश

वादों के गड़े मुर्दे अब न उखाड़ो !

भगवान को खाँसी आयी थी !

मैं मनुष्य हूँ !

कब मैंने बोला ..

और कौन?

क्यों ढूँढू तुमको मैं, जाने अनजानों में

डेढ़ घंटे !!!

यूँ इतराता फिरू मैं....

कौन पूछे मुझे यहाँ ?

पता नहीं

एक लड़की.......