संदेश

न्याय - सूत्र (१)

षड-रिपु

दो भिखारी

एक दुविधा

एक प्रश्न

पान तम्बाखू चिलगम

नील पड़ जाता था..

चाय की मीमांसा

मैं तुम्हारे साथ भी होता तो क्या !

व्यथा की प्रथा

Moon & Sun

वादों के गड़े मुर्दे अब न उखाड़ो !

भगवान को खाँसी आयी थी !

मैं मनुष्य हूँ !

कब मैंने बोला ..

और कौन?

क्यों ढूँढू तुमको मैं, जाने अनजानों में

डेढ़ घंटे !!!

यूँ इतराता फिरू मैं....

कौन पूछे मुझे यहाँ ?